हज की यात्रा

जानिए कैसे शुरु होता है हज यात्रियों का सफर

हज की यात्रा – मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोगों के लिए हज सबसे बड़ा होता है।

हर मुसलमान को नमा़ज, रोजा और हज करना होता है। अगर आप हज जाना चाहते हैं तो पहले जान लीजिए कि हज की शुरुआत कैसे हुई।

हज पर जाने से पहले लोग एहतराम से तैयार होते हैं। हज पर जाने वाले लोगों को हाजी कहा जाता है। हज पर जाने वाले पुरुषएक सफेद रंग का पोशाक ओढते हैं और महिलाएं भी अपने पूरे शरीर को सफेद रंग के कपड़े से ढंक लेती है। हज पर जाने वाले यात्रियों को परफ्यूम और नेल पॉलिश जैसी फैशन की चीज़ों का प्रयोग करने की मनाही होती है।

मक्‍का शरीफ से शुरु होती है हज की यात्रा जहां पर हाजी काबे के चारों और घड़ी की उल्‍टी दिशा में सात बार चक्‍कर लगाते हैं। हाजियों की इबादत की इस प्रक्रिया को तवाफ कहा जाता है।

इस्‍लामिक धर्म ग्रंथों के अनुसार जब इब्राहिम की बेगम हाज़रा गर्म रेगिस्‍तान में उसके लिए पानी तलाश रही थी तब उसे अल्‍लाह की रहमत से इसी पत्‍थर से पानी निकलता हुआ दिखाई दिया था। इसे आबे आजम कहा जाता है।

उमरा खत्‍म करने के बाद हाजी हज की शुरुआत करते है। शनिवार के दिन ही हज की शुरुआत होती है और इसके लिए हाजियों को 5 किमी दूर मीना मस्जिद पहुंचना होता है।

अगले दिन यानि रविवार को हज यात्री जबल उर रहमा नामक पहाड़ी पर ए‍कत्रित होते हैं। मीना मस्जिद से 10 किमी दूर इस पहाड़ी के चारों तरफ बैठकर हाजी नमाज़ भी पढ़ते हैं।

सूरज के ढलने के बाद हज यात्री अराफात पहाड़ी और मीना मस्जिद के बीच में बसे मुजदलफा जाते हैं। यही वो स्‍थान है जहां हज यात्री शैतान को मारने वाली प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पत्‍थर इकट्ठा करते हैं।

सुबह होते ही हाजी ईद मनाते हैं और अपने साथ लाए हुए पत्‍थर शैतान को मारतते हैं। पत्‍थर मारने की रस्‍म रोज़ाना तीन बार होती है।

ऐसी सभी रस्‍मों के बाद हज यात्री वापिस लौटने से पहले एक बार काबे की तरफ तवाफ करते हैं।

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