पापमोचनी

पापमोचनी एकादशी देती है व्यक्ति के सभी पापों से मुक्ति – भगवान कृष्ण ने बताई है व्रत की सही विधि   

चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी बोलते हैं. पापमोचनी एकादशी का वर्णन खुद भगवान कृष्ण ने अर्जुन के सामने किया था. कृष्ण ने बताया था कि इस दिन जो व्यक्ति सच्चे दिन से अपना कोई पाप स्वीकार करता है या अपनी किसी बुरी आदत का त्याग करके, पूरा दिन विधि-विधान तरीके से पूजा-व्रत करता है तो भगवान की कृपा से उसके पापों की सजा को खत्म कर दिया जाता है. बस वह व्यक्ति अपने उस पाप को दुबारा कभी ना दोहराए.

अब आप ही बताइए कि अगर भगवान कृष्ण खुद अपने मुख से किसी व्रत का महत्त्व बताया है तो क्या वह फलदायी नहीं होगा? नारद पुराण में भगवान कृष्ण कहते हैं कि पाप मोचनी एकादशी का व्रत कुछ 100 यज्ञों के बराबर का फल देता है. पापमोचनी एकादशी पर विष्णु भगवान के चतुर्भुज रूप की पूजा का विधान है. इस व्रत की कथा भी बड़ी रोचक है. पापमोचनी एकादशी व्रत कथा का जिक्र नारद पुराण और भविष्यपुराण दोनों जगहों पर किया गया है.

 

यह है पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा

एक समय लोमश ऋषि हुआ करते थे . एक राजा इनके यहाँ आता है और अपने पाप खत्म करने का कोई उपाय पूछता है. तब ऋषि लोमश ने राजा को यह कहानी बताई थी – चैत्ररथ नामक सुन्दर वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या में लीन थे. सालों से यह ऋषि अपनी तपस्या में लगे हुए थे और एक दिन  वन में मंजुघोषा नामक अप्सरा की नजर ऋषि पर पड़ी, तो वह उन पर मोहित हो गई और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करने लगी. अप्सरा अपने प्रयास में सफल हुई और ऋषि की तपस्या भंग हो गई. कहते हैं कि यह ऋषि सालों से भगवान शिव की तपस्या कर रहे थे लेकिन कामदेव के जाल की वजह से ऋषि की तपस्या भंग हो गयी थी.

कई सालों बाद ऋषि को यह अहसास हुआ था कि वह तो मोक्ष के काफी नजदीक थे उअर आज इस अप्सरा की वजह से वह भगवान से कितनी दूर चले आये हैं. ऋषि को ऐसा लगता है कि यह अप्सरा किसी की चाल थी और यह सिर्फ और सिर्फ मेरी तपस्या भंग करने मेरे पास ई थी. ऋषि ने अप्सरा को श्राप दे दिया कि तुम पिशाचिनी बन जाओ. श्राप से दु:खी होकर वह ऋषि के पैरों पर गिर पड़ी और श्राप से मुक्ति के लिए प्रार्थना करने लगी. कहते हैं कि तब ऋषि ने तब उस अप्सरा को विधि सहित चैत्र कृष्ण एकादशी जो पापमोचिनी एकादशी होती है उसका व्रत करने को कहा था.

ऋषि भी इस समय में काफी पाप कर चुके थे अतः उस समय इस ऋषि ने भी पापमोचनी एकादशी पर व्रत रखकर अपने पापों के लिए भगवान से क्षमा मांगी थी. बाद में अप्सरा भी भूत योनि से निकलकर स्वर्ग गयी थी और ऋषि को भी इस एकदशी की वजह से मोक्ष प्राप्त हुआ था.

इस तरह से पापमोचनी एकादशी का महत्त्व शास्त्रों में विशेष तौर पर बताया गया है. इस साल पापमोचनी एकादशी मार्च महीने की 24 तारीख को है. पापमोचनी एकादशी की शुरुआत तो 23 मार्च को होगी और दोपहर 01 बजकर 27 मिनट से तिथि के शुरुआत होगी जो अगले दिन अर्थात 24 मार्च तक दोपहर 13 बजकर 53 मिनट तिथि का अंत होगा.

 

पूजन विधि

पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप का ध्यान करना चाहिए. सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करके विष्णु भगवान की पूजा आराधना शुरू कर दें. जिन लोगों को व्रत रखना है वह इस दिन जल पर भी व्रत रख सकते हैं या फिर सात्विक खाना ही खाएं. इस दिन किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह का पाप, छोटा या बड़ा नहीं करना होता है.

यदि कोई व्यक्ति इस दिन विष्णु पूजन या सत्यनारायण कथा करा लेता है तो व्यक्ति को विशेष लाभ प्राप्त होता है. आप योर फार्च्यून की मदद से आराम से सत्यनारायण कथा का आयोजन करा सकते हैं.

किसी व्यक्ति के जीवन में सदा कलेश और दुःख बने रहते हैं तो उसको निरंतर समय अंतराल से विष्णु पूजन कराते रहना चाहिए. आपको विष्णु पूजन के बारें में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करना चाहिए.

शाम को विष्णु जी का पूजन करके ही व्रत खोलना चाहिए और अपने पापों की क्षमा मांगनी चाहिए. इस प्रकार से आप 24 मार्च 2017 को पापमोचनी एकादशी का व्रत करके लाभ कमाना चाहिए.

जरुर पढ़े, माँ तुलसी कौन हैं और उनकी पूजा क्यों की जाती है?- यंगिस्थान की मदद से जानें कि तुलसा जी की पूजा क्यों करनी चाहिए?

 

Share this post