मंत्र जाप के नियम

किसी भी मंत्र का जाप करने से पहले आपको पता होने चाहिए मंत्र जाप के ये नियम !

मंत्र जाप के नियम – हिंदू धर्म में मंत्र जाप का बहुत महत्‍व है।

मन को एक तंत्र में लाने का प्रयास ही मंत्र होता है। अगर आपके मन में एकसाथ अनेक विचार चल रहे हैं तो उन सभी को समाप्‍त करने का एक ही मार्ग है और वो है मंत्र साधना।

मंत्र जाप करने के बाद दिमाग एक आयामी और सही दिशा में गति करने वाला बनता है।

मंत्र से क्‍या होता है ?

किसी देवी-देवता की साधना के लिए मंत्र का जाप किया जाता है। मंत्र में इतनी शक्‍ति होती है कि इससे भूत-पिशाच को भी साधा जा सकता है। मंत्र साधना भौतिक बाधाओं का आध्‍यात्‍मिक विचार है। अगर आपके जीवन में काई समस्‍या या बाधा है तो उस मुसीबत को मंत्र जाप से भी हल किया जा सकता है। मंत्र का जाप करने से मन बुरे विचारों से दूर रहता है। मन और मस्तिष्‍क में नए और सकारात्‍मक विचार बने रहते हैं। सात्‍विक रूप से निश्‍चित समय और निश्‍चित स्‍थान पर बैठकर प्रतिदिन मंद्ध का जाप करते हैं तो साधक के मन में आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है।

माला का जपना क्‍या होता है?

वैदिक काल से हिंदू धर्म में ईश्‍वर को प्रसन्‍न करने और अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु मंत्र का जाप करने का विधान है। शास्‍त्रों के अनुसार निश्चित संख्‍या में मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्‍ति होती है। मंत्र के जाप में गणना आवश्‍यक है। जप गणना के लिए माला का प्रयोग किया जाता है। जिस देवी-देवता को प्रसन्‍न करने के लिए आप मंत्र का जाप कर रहे हैं उनसे संबंधित माला से जाप करने से आपको दोगुना फल मिलता है।

माला जपने का नियम

मंत्र का जाप करते समय माला फेरी जाती है जिससे जप संख्‍या का पता लगता है। प्रत्‍येक माला में 108 मनके होते हैं। दाहिने हाथ से माला का जाप करना चाहिए। ध्‍यान रहे जप करते समय माला भूमि पर स्‍पर्श न हो।

मंत्र के प्रकार

शास्‍त्रों के अनुसार मंत्र तीन प्रकार के होते हैं – वैदिक मंत्र, तांत्रिक मंत्र और शाबर मंत्र।

मंत्र जाप के भेद – वाचिक जप, मानस जप और उपाशु जप।

वाचिक जप में ऊंचे स्‍वर में स्‍पष्‍ट शब्‍दों में मंत्र का उच्‍चा‍रण किया जाता है। मानस जप का अ‍र्थ मन ही मन जप करना होता है। उपांशु जप में साधक की जीभ या होंठ हिलते हुए दिखाई देते हैं लेकिन आवाज़ सुनाई नहीं देती है।

मंत्र जाप के नियम

– मंत्र जाप का सबसे पहला नियम है मंत्र का सही उच्‍चारण करना।

– जिस मंत्र का जाप करना है उसका अर्घ्‍य पहले से लें।

– मंत्र सिद्धि को गुप्‍त रखना चाहिए। प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है।

– कम से कम 108 मनकों का जाप अवश्‍य करना चाहिए।

ये है मंत्र जाप के नियम – किसी विशिष्‍ट सिद्धि के लिए सूर्य अथवा चंद्रग्रहण के समय किसी भी नदी में खड़े होकर जाप करना चाहिए। इस तरह किया गय जाप अतिशीघ्र फल देता है। जाप का दक्षांश हवन करना चाहिए और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराना चाहिए।

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